नवगछिया। प्रखंड के ढोलबज्जा स्थित भगवानपुर पंचायत सरकार भवन के समीप आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग के दूसरे एवं अंतिम दिन पूज्यपाद स्वामी पूर्ण चेतन महाराज ने गुरु महिमा, सत्संग-योग और मोक्ष-दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संतमत परंपरा में गुरु का स्थान सर्वोच्च है, क्योंकि सद्गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर आत्मज्ञान और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।
स्वामी पूर्ण चेतन महाराज ने कहा कि संतमत के महान संत संतसेवी परमहंस जी महाराज ने अपने स्व-अनुभवी आध्यात्मिक ज्ञान को सत्संग-योग और मोक्ष-दर्शन जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकों में समाहित किया है। उन्होंने बताया कि संतसेवी परमहंस जी महाराज, महर्षि मेंहीं को अपना मस्तिष्क मानते थे, जो उनकी सुदृढ़ गुरु-शिष्य परंपरा, गहन श्रद्धा और कठोर आध्यात्मिक अनुशासन को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल ज्ञान का हस्तांतरण नहीं, बल्कि साधना, अनुभूति और आत्मिक उन्नति का मार्ग है। संपूर्ण सृष्टि में गुरु से बढ़कर कोई नहीं है—गुरु ही जीवन को दिशा देता है और मोक्ष का द्वार खोलता है।

सत्संग में स्वामी जगरनाथ, स्वामी भावेशानंद, स्वामी विनय सागर, स्वामी बलबीर बाबा, स्वामी तारिणी बाबा, स्वामी महानंद बाबा, लड्डू बाबा, गांधी बाबा और उमेश बाबा की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान ढोलबज्जा पंचायत के सरपंच सुशांत कुमार ने संत-महात्माओं को अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया।

