भागलपुर/नवगछिया: गंगा नदी पर बनने वाली बहुप्रतीक्षित विक्रमशिला-कटारिया नई रेल लाइन परियोजना जल्द ही धरातल पर उतर सकती है। करीब 2549 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य दिसंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक छत्रसाल सिंह ने सोमवार को पाटलिपुत्र-शाहपुर पटोरी-बरौनी-नवगछिया रेलखंड के विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण के दौरान यह संकेत दिया।
महाप्रबंधक ने निरीक्षण के दौरान विभिन्न स्टेशनों, पुल-पुलियों, ओएचई प्रणाली, ट्रैक संरचना तथा रेल पथ की सुरक्षा एवं मजबूती का जायजा लिया। इसके साथ ही उन्होंने विक्रमशिला-कटारिया नई रेल लाइन परियोजना के प्रस्तावित निर्माण स्थल और भागलपुर की ओर बनने वाले नए स्टेशन स्थल का भी निरीक्षण किया।
26 किलोमीटर लंबी होगी नई रेल लाइन
परियोजना के तहत लगभग 26 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन का निर्माण किया जाएगा। यह रेल लाइन भागलपुर के विक्रमशिला स्टेशन को कटिहार-बरौनी रेलखंड के कटारिया स्टेशन से जोड़ेगी। परियोजना पूरी होने के बाद कोसी, सीमांचल और अंग क्षेत्र के बीच रेल संपर्क और अधिक मजबूत होगा।

वाई आकार का बनेगा रेल पुल
इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा गंगा नदी पर बनने वाला रेल पुल है। प्रस्तावित पुल वाई (Y) आकार का होगा, जो उत्तर दिशा में कटारिया और नवगछिया तथा दक्षिण दिशा में विक्रमशिला और शिवनारायणपुर स्टेशनों को जोड़ेगा। इससे बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र का अंग क्षेत्र से सीधा रेल संपर्क स्थापित होगा।
2.44 किलोमीटर लंबा होगा डबल लाइन रेल पुल
गंगा नदी पर बनने वाला 2.44 किलोमीटर लंबा डबल लाइन रेल पुल परियोजना की आधारभूत कड़ी माना जा रहा है। रेलवे ने इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार अगले तीन महीनों के भीतर टेंडर प्रक्रिया और पुल के डिजाइन को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है। पुल का निर्माण कार्य सबसे पहले शुरू किया जाएगा।
180 हेक्टेयर जमीन की होगी आवश्यकता
पूरी परियोजना के लिए गंगा रेल पुल सहित दोनों ओर करीब 180 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। इसमें आधे से अधिक निजी भूमि शामिल है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए संबंधित किसानों और भू-स्वामियों के लिए 20ए एवं 20ई की अधिसूचना जारी की जा चुकी है।
सवा करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने से कोसी, सीमांचल और अंग क्षेत्र की एक करोड़ से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी।

