नारायणपुर : प्रखंड में चार सौ वर्षों से पानी की खेती की जा रही है। पहले यहां करीब 20 बीघे में पान की खती होती थी। लेकिन कलकतिया पान के आवक से लोकल पान की बिक्री घट गई। किसानों को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिल रही है।
नतीजतन पान की खेती करना किसानों के लिए टेढ़ी खीर है। अभी पान की खेती नगरपारा, भवानीपुर और नवटोलिया में होती है। सत्तन चौरसिया ने बताया कि एक बीघा पान की खेती करने में करीब तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। पान तैयार होने में एक वर्ष लगता है। यहां देसला, मगही और बरगो तीन प्रकार के पान का उत्पानदन खाद का होता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। पान समस्तीपुर तक भेजा जाता है, लेकिन किसानों का व्यवसाय कलकतिया पान पूरी तरह प्रभावित करता है। चूकि कलकतिया पान नगरपारा, भवानीपुर और नेवटोलिया की पान की तुलना में सस्ता है, इसलिए पान दुकानदार सस्ते में खरीदते हैं। तैयार करने के लिए एक साल में करीब 1600 मजदूर एक बीघा में काम करते हैं।
कलकतिया पान की अपेक्षा लोकल पान की बिक्री काफी कम है। इसलिए अब भवानीपुर, बीरबन्ना, नगरपारा, नवटोलिया में लगभग छह बीघा में ही पानी की खेती हो रही है। किसान सत्तन चौरसिया, श्रवण चौरसिया, कैलाश चौरसिया, कारे चौरसिया, पंकज चौरसिया, उमेश चौरसिया, जोगी चौरसिया, भाटो चौरसिया, शुभंकर चौरसिया, नवीन चौरसिया बताते हैं कि जब मौसम की मार खेती पर पड़ता है तो कमर टूट जाती है। लेकिन अभी तक किसी भी सरकारी स्तर पर कोई लाभ नहीं मिला है। उचित कीमत पर पान की बिक्री के लिए उन्हें अस्थाई बाजार मिल जाता तो माली हालत में सुधार हो जाता।

^पान की खेती को बचाए रखने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा। जिले में पान की खेती के लिए अनुदान का प्रावधान नही हैं। लेकिन जांच कर आकलन किया जाएगा। अगर ऐसा प्रतीत होगा कि पान की खेती को बढ़ावा दिया जा सकता है तो सरकार से अनुरोध किया जाएगा कि अन्य जिले की तरह भागलपुर में भी अनुदान दिया जाए। – अभय कुमार मंडल, सहायक निदेशक, उद्यान

